Sunday, June 4, 2023

खुद को भला कैसे बंया करें...

पता नहीं अब कुछ लिखती हूँ तो 
अपने ही शब्दों पर हँसी सी आ जाती है,,
लेकिन कभी-कभी लिखे शब्दों पर नहीं...
जो वाकई में लिखे नहीं होते उन शब्दों को 
सोचकर रोना भी आ जाता है,,,
फिर उन आंसुओं को ऐसे पोछते हैं,,
कि नहीं तू कैसे रो सकती है... 
नहीं तुझे आंसुओं के सामने खुद को कमज़ोर 
नहीं होने देना है...
और तू फिर से खड़ी हो जाती है एक मुस्कान के साथ,,,
क्यूंकि शायद इसे जीना आ गया हैं....😌🙂

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