ये मैं खुद को भी नहीं समझ आता,
ज़िंदगी में कुछ स्थिर ही नहीं रह पाता,
आज है,वही कल कुछ और हो जाता,
क्यूँकी परिवर्तन ही तो सृष्टि का नियम है...
फिर क्या... यूँ तो मैं अपनी ही बात में फंसता चला जाता...
अब बताओ इस तरह मैं कैसे,
अपनी ही बात पर टिक पाता...🤔😇
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