Tuesday, September 27, 2022

हम ज़िन्दगी में कुछ भी करें ,
अगर करना चाह रहे हैं तो सही हैं 
लेकिन अगर करना पड़ रहा है,
तो बहुत बड़ा अन्याय है अपनों के साथ भी
और अपने साथ भी
कहते हैं प्रेम में अक्सर धोखा ही मिलता है,
लेकिन प्रेम में धोखा कैसे मिल सकता है,
ये तो तभी हो सकता है जब हम सामने वाले शर्तों के आधार पर प्रेम करते हैं,
वैसे फिर ये प्रेम कहाँ हुआ ,ये तो एक सौदेबाजी हुई...
प्रेम तो वो होता है,जिसके ख्याल से ही एक मुस्कान केवल होठों पर नहीं, आंखो में भी नमी ले आती है...
प्रेम तो वो है,जहां क्यों,क्या कैसे जैसे प्रश्नवाचक नहीं आते,,


Monday, September 26, 2022

चलो ना फिर से...🙏

आखिर इतनी भी क्या शिकायत इस ज़िन्दगी से,
कि हम खुल के जी न पाएं.....
 ऐसा क्या ही है कि हम खुद को स्वीकार न कर पाए,
क्यों बदलना ही है किसी को ,क्यो खुद ही न बदल जाए, 
ऐसा भी क्या ख़फा होना इस ज़िन्दगी से, कि मुंह से मरने तक की बात निकल जाए....
चलो एक दिन साथ बैठते हैं ना,कि कुछ पल खुल के जी लिया जाए.....
वरना ज़िन्दगी का वैसे भी क्या भरोसा, कौन पहले या कौन बाद चला जाए......
क्यों न एक बार फिर से उन बचपन की यादों को फिर से ताजा कर लिया जाए.......
छोड़ों इस दुनिया को मां, चलो फिर से खुद को खुद के साथ एक कर दिया जाए....❤️🙏

                          
                        ।।  कल्पना विश्वकर्मा ।।

                   

Sunday, September 25, 2022

कहते हैं जो वास्तव में किसी से सच्चा प्यार करते हैं, 
तो वो उसे किसी और के साथ नहीं देख ही नहीं सकते....
असल में तो इसे सच

Thursday, September 22, 2022

कहते हैं खुद को इतना बेहतर बनाओ कि लोग चाहकर भी तुम्हें भुला न सके,
लेकिन हम तो पहले ही बेहतर थे,तभी कोई बेहतरीन तलाश कर सके......

मन...

कैसा सा है रे तू कितना ही छुपा के रखूं,याद आ ही जाता है,
दिन तो यू गुज़र जाते हैं,पर रात को बङा सताता है............

 मंज़िल और सफर एक-दूसरे के पूरक ही तो हैं, जिसमें सफर सुकून तो मंज़िल तो बस जरूरत हैं मगर इसी मंज़िल की आड़ में सफर को ही किया अनदेखा है देख...