Thursday, September 22, 2022

मन...

कैसा सा है रे तू कितना ही छुपा के रखूं,याद आ ही जाता है,
दिन तो यू गुज़र जाते हैं,पर रात को बङा सताता है............

No comments:

Post a Comment

 मंज़िल और सफर एक-दूसरे के पूरक ही तो हैं, जिसमें सफर सुकून तो मंज़िल तो बस जरूरत हैं मगर इसी मंज़िल की आड़ में सफर को ही किया अनदेखा है देख...