लेकिन प्रेम में धोखा कैसे मिल सकता है,
ये तो तभी हो सकता है जब हम सामने वाले शर्तों के आधार पर प्रेम करते हैं,
वैसे फिर ये प्रेम कहाँ हुआ ,ये तो एक सौदेबाजी हुई...
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प्रेम तो वो होता है,जिसके ख्याल से ही एक मुस्कान केवल होठों पर नहीं, आंखो में भी नमी ले आती है...
प्रेम तो वो है,जहां क्यों,क्या कैसे जैसे प्रश्नवाचक नहीं आते,,
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