Sunday, August 27, 2023

कुछ यूं ही...

कभी तो आप भी कुछ कहो,

कभी तो आप भी अपने को सुनाओ

यूं ही ये खामोशियां कब तक

 एक मुस्कराहट से संभलती रहेगी,

यूं तो बहुत ही व्यस्तता में रही है ज़िन्दगी 

लेकिन एक बार खुद ही से तो मिल जाओ 

लोग क्या सोचेंगे ये कहकर खुद ही से नज़रे तो न चुराओ,

माना कि उलझे हैं खुद की कहानियों में...

लेकिन एक बार किसी के किस्से को साथ में तो सुलझाओ

फिर क्या इन किस्सों का कहानियों में तब्दीली शायद ही हो,

और फिर क्या किस्से,किसकी कहानी,,,

सब बस यूं ही रह जाएंगे,

 कभी इसकी,कभी उसकी जुबानी...






No comments:

Post a Comment

 मंज़िल और सफर एक-दूसरे के पूरक ही तो हैं, जिसमें सफर सुकून तो मंज़िल तो बस जरूरत हैं मगर इसी मंज़िल की आड़ में सफर को ही किया अनदेखा है देख...