Tuesday, January 31, 2023

शब्दों के बीच.....

  ज़िंदगी अगर शब्दों में बयां हो पाती, 
तो हर बेज़ुबा इंसान शब्दों का मोहताज होता.....

शब्दों को ऐसे भी क्या पिरोना ,
कि शब्दों को समझने वाला भी निःशब्द हो जाए......

कुछ भी कहो,,,,,शब्दों की लड़ाई में ,
इन भावनाओं का क्या क़ुसूर ,यदि शब्दों में समा ही न पाए........
अब तो जीने में क्या ही मजा है, 
यदि हर कोई ,हर किसी को शब्दों में समझ पाए......

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