Wednesday, December 28, 2022

सबकुछ बंया नहीं करते ये शब्द, 
अब तो निशब्द हो जाते हैं ये शब्द, 
कैसे बंया हो,ये जहां, 
जिसके न जाने कितने हैं इम्तिहाँ, 
कभी ये जुबां है गुमसा, 
तो कभी आंखे हैं टंगसा,
अब तो शब्दों में भी न रहा भरोसा,
क्या पता कब निकल जाए ये झूठसा.....

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