समय कहां है?---
हर मध्यमवर्गीय परिवार की कहानी, हर मां-बाप की जुबानी----
बचपन से कुछू सुने हुअए चाहे नाही लेकिन एक चीज तो सबय सुनतय आए हैं कि समय बार-बार नहीं आवत पढ़-लिख लियो नहीं तो बाद मा याद करिहव कि फलाने का कहत रहें...
अब कौनेव तरह पढ़-लिख गवा तो अब बारी है नौकरी कर लियव , नहीं तो कटोरा लइके भीख मांगेव ...😆
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