Saturday, June 12, 2021

कुछ देसी अंदाज में..

 समय कहां है?---

हर मध्यमवर्गीय परिवार की कहानी, हर मां-बाप की जुबानी----

बचपन से कुछू सुने हुअए चाहे नाही लेकिन एक चीज तो सबय सुनतय आए हैं कि समय बार-बार नहीं आवत पढ़-लिख लियो नहीं तो बाद मा याद करिहव कि फलाने का कहत रहें...
अब कौनेव तरह पढ़-लिख गवा तो अब बारी है नौकरी कर लियव , नहीं तो कटोरा लइके भीख मांगेव ...😆

No comments:

Post a Comment

 मंज़िल और सफर एक-दूसरे के पूरक ही तो हैं, जिसमें सफर सुकून तो मंज़िल तो बस जरूरत हैं मगर इसी मंज़िल की आड़ में सफर को ही किया अनदेखा है देख...