बचपन से तो केवल पढ़ा-लिखा समझा कुछ नहीं,बङे हुए तो इतना समझ लिया कि ज़िन्दगी जिया नहीं,,,
Saturday, June 12, 2021
कुछ देसी अंदाज में..
समय कहां है?---
हर मध्यमवर्गीय परिवार की कहानी, हर मां-बाप की जुबानी----
बचपन से कुछू सुने हुअए चाहे नाही लेकिन एक चीज तो सबय सुनतय आए हैं कि समय बार-बार नहीं आवत पढ़-लिख लियो नहीं तो बाद मा याद करिहव कि फलाने का कहत रहें...
अब कौनेव तरह पढ़-लिख गवा तो अब बारी है नौकरी कर लियव , नहीं तो कटोरा लइके भीख मांगेव ...😆
#peaceful nature
दुनियाभर के रिश्तों के इस जंजाल में एक प्रकृति ही तो है जो कभी किसी को धोखे में नहीं रखती ,जो है वही बंया करती है ....
बादलों की इस प्यारी सी हँसी मानों हमें सूकून देने की कोशिश में हो..
Thursday, June 10, 2021
एक छोटी सी शुरुआतः कुछ लिखने की, कुछ ऐसे कह जाने की ,कुछ इसमें खो जाने की ....
जीवन एक द्वन्द्व नहीं तो क्या है...
जो द्वन्द से निकल जाता है, वो सुलझ जाता है ....
जो इसमें फंस जाता है ,वो झुलंस जाता है ....
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मंज़िल और सफर एक-दूसरे के पूरक ही तो हैं, जिसमें सफर सुकून तो मंज़िल तो बस जरूरत हैं मगर इसी मंज़िल की आड़ में सफर को ही किया अनदेखा है देख...
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Hm agar kisi ke liye itna concern h to kyu secret rakhna chahte h,,,,, Kahi ye fear to nhi ki ho mna kr diya ya uski feelings vaisi na hui t...
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Talking to Myself... Kya tune kabhi socho tha ki Teri life me bhi kisi ki entry ho jayegi... Aur tu kah bhi degi usse ...ye to bilkul hi had...
