Saturday, December 17, 2022

think about....1

 We live most of our lives *Indirectly* and in *Assumptions*........🤗😊🤔

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 मंज़िल और सफर एक-दूसरे के पूरक ही तो हैं, जिसमें सफर सुकून तो मंज़िल तो बस जरूरत हैं मगर इसी मंज़िल की आड़ में सफर को ही किया अनदेखा है देख...