लेकिन क्या पता था कि वो ही हमें ही गलत समझ के बैठा है,,,,,
कितना मुश्किल होता है,किसी से अपनी सफाई में चार शब्द बोल पाना ,,,
ये सोचकर नहीं कि उसे साबित करना है खुद को,
बल्कि इसलिए कि ऐसे भी क्या रिश्ते,जिनकी मांग साबित करने पर टिकी हो........💔
मंज़िल और सफर एक-दूसरे के पूरक ही तो हैं, जिसमें सफर सुकून तो मंज़िल तो बस जरूरत हैं मगर इसी मंज़िल की आड़ में सफर को ही किया अनदेखा है देख...
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