ज़िन्दगी के हर पहलू को छूने की कोशिश करो
देखना एक प्यारी सी खुशी जो अन्दर को छूती है न
कि हमारी अन्दर की हर एक कोशिका खिल उठती है..जैसे बाहर की दुनिया में गलिया हरियाली से .....
-कल्पना विश्वकर्मा
मंज़िल और सफर एक-दूसरे के पूरक ही तो हैं, जिसमें सफर सुकून तो मंज़िल तो बस जरूरत हैं मगर इसी मंज़िल की आड़ में सफर को ही किया अनदेखा है देख...
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