Monday, October 2, 2023

 मंज़िल और सफर एक-दूसरे के पूरक ही तो हैं,


जिसमें सफर सुकून तो मंज़िल तो बस जरूरत हैं

मगर इसी मंज़िल की आड़ में सफर को ही किया अनदेखा है

देखना इसी मंज़िल 

मंज़िल कैसी  भी हो

ये नहीं तो वो ,वो नहीं तो ये मिल ही जाती है 

लेकिन वो मंज़िल ही क्या जिसमें सफर.का सुकून ही न.हो

लेकिन उस मंज़िल का सुकून तभी है

जब सफर आनंदमय रहा हो...


मंज़िल कैसी भी हो

मिल ही जाती है 

लेकिन उस मंज़िल का सुकून तभी है

जब सफर आनंदमय रहा हो...

क्योंकि उस मंज़िल को पाने के बाद फिर एक नया सफर शुरु होता है...




 मंज़िल और सफर एक-दूसरे के पूरक ही तो हैं, जिसमें सफर सुकून तो मंज़िल तो बस जरूरत हैं मगर इसी मंज़िल की आड़ में सफर को ही किया अनदेखा है देख...